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मामी सास की मस्ती

रेषक : जैस पंचाल

दोस्तो, मैंने अन्तर्वासना में बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं इसलिए मैंने सोचा कि मैं भी अपनी एक कहानी आप लोगो के समक्ष प्रस्तुत करूँ !

मैं अपना परिचय करा दूँ आप लोगों को ! मैं 25 वर्ष का हूँ, मेरी शादी को 5 वर्ष हो गए हैं। मैं महोबा का रहने वाला हूँ।

यह बात उन दिनों की है जब मैं 23 वर्ष का था। एक बार मेरी पत्नी के मामा जी के पैर का ओपरेशन हुआ क्योंकि उनके पैर में पानी आ गया था। मामाजी को झाँसी में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। देखाभाल के लिय नाना-नानी साथ में चले गए। घर में मामी अकेली रह गई। सो उन्होंने मुझे फोन किया और कहा- मैं घर में अकेली हूँ, मोहिनी को मेरे पास भेज दें तो अच्छा होगा !

मैंने उनसे हाँ कह दिया। मेरे घर से मामा जी का घर दो किलोमीटर दूर है। मैंने अपनी मम्मी से आज्ञा ली और मोहिनी (मोहिनी मेरी पत्नी का नाम है) को लेकर उनके घर पहुँच गया। मामी जी ने हमारा बड़ा सम्मान किया।

मैंने कहा- मामी, अब मै जाने की इजाजत चाहूँगा !

मामी बोली- अभी नही जाने दूँगी ! सुबह जाना !

मैंने बहुत कहा पर वो नहीं मानी तो मैं रुक गया। रात को हमने डिनर किया उसके बाद मामी मामा की तबीयत के बारे में बताने लगी। काफी देर हो गई और हम सो गए। सुबह मेरी ससुराल से फोन आया कि मेरे साले के बेटे का कूप-पूजन है अतः मोहिनी को आज ही भेज दें।

मैंने मोहिनी को बताया तो वो बोली- आप यहाँ रुक जाइये, मैं चली जाती हूँ।

मामी ने भी सहमति दे दी। अब मैं और मामी अकेले घर में थे। मामी कभी-2 मुझसे मजाक किया करती थी तो मुझे अच्छा लगता था। मामी बहुत ही सेक्सी लगती थी उनके उरोज बहुत बड़े-2 थे जैसे पपीते का फल हो, उनके भारी नितम्ब मुझे उत्तेजित कर देते थे।

उस दिन भी मामी मजाक के मूड में थी और मजाक करने लगी। मजाक-2 में ही वो मुझे गुदगुदाने लगी।

मैंने कहा- मामी, मुझे गुदगुदाओ मत !

लेकिन वो नहीं मानी और उनसे छूटने के चक्कर में मैं यहाँ-वहाँ हाथ-पैर चलाने लगा तो वो फर्श पर गिर पड़ी और मैं उनके ऊपर गिर पड़ा क्योंकि उन्होंने मुझे पकड़ रखा था। जैसे ही मैं उनके ऊपर गिरा, मेरे हाथ उनके उरोजों पर थे और होंट गालों पर !

मुझे लगा कि मामी कहीं गलत न सोचने लगे, तो मैं उठने लगा तो उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे चूमने लगी। मैं कुछ समझ नहीं पाया।

लेकिन जल्दी ही मैं सब समझ गया और फिर क्या था, मैं भी टूट पड़ा वहशी दरिन्दे की तरह !

मैं उत्तेजित तो हो ही चुका था, मैंने उनका ब्लाउज उतार दिया और उनके उरोज दबाने लगा।

मामी बोली- इन्हें चूस लो मेरे राजा ! बहुत दूध भरा है इनमें ! चूस-2 कर खाली कर दो !

मैं उनके बड़े-2 उरोज एक बच्चे की तरह चूसने लगा और एक हाथ से उनके बाल पकड़ लिए और दूसरा हाथ नीचे की तरफ ले गया। उन्होंने साड़ी पहनी थी, मैंने धीरे से उनकी साड़ी अलग कर दी और पेटीकोट खोल दिया। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनकी चूत पर ले गया। मामी की चूत के बाल साफ थे, एसा लगता था जैसे आज ही साफ किये हों।

मैंने कहा- मामी, क्या अपने अपनी चूत के बाल आज ही साफ किये हैं?

मामी बोली- हाँ मेरे राजा, आज मैं बहुत चुदासी हो रही थी इसलिए बाल साफ किये और ऊँगली भी डालती रही !

तो मैंने कहा- मामी, मेरे होते हुए आपको ऊँगली नहीं करनी पड़ेगी ! मैं किस मर्ज की दवा हूँ !

और मामी मुस्कुरा दी।

मैंने मामी की प्यारी चूत में ऊँगली डाल दी। मामी कामुक सिसकारी लेने लगी। मामी की चूत ने पानी छोड़ दिया और उनका बदन ऐठने लगा। मामी की चूत में आग सी लग गई।

अचानक ही मामी ने मुझे पकड़ कर नीचे पटक दिया और अपनी गर्म चूत मेरे मुँह पर रख दी 69 की मुद्रा में और मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और चूमने लगी। मेरा लंड महाराज नौ इंच का पूरा लौड़ा था। मामी मेरा लंड सोफ्टी की तरह चूस रही थी।

मैंने भी कमी नहीं की, उनकी चूत को जीभ से चोद-2 कर लाल कर दिया। उनकी चूत फड़कने लगी, वो इतनी चुदासी हो गई कि उस समय पागल सी लगने लगी। वो एकदम उठ कर नीचे लेट गई और मुझे अपने ऊपर कर लिया और बोली- चोद दे मुझे ! चोद बहन के लोड़े मेरी चूत को चोद ! मेरे राजा चोद ! मेरी चूत आज बहुत चुदासी है !

और वो सिसकारी लेने लगी। मैंने अपना लंड महाराज उसकी चुदासी चूत पर जैसे ही रखा वो चुदाने के लिए अपनी गाण्ड ऊपर उठाने लगी। मैंने अपना लण्ड चूत के मुँह पर रख कर एक जोरदार धक्का मारा तो उसकी चीख निकल गई। मैंने अपने होंट उसके होंटों पर रख दिए और चूसने लगा और हाथों से उसके उरोज दबाने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने धीरे-2 धक्के लगाने शुरू कर दिए। मामी मस्त हो कर चुदाने लगी और कामुक सीत्कार करने लगी।

वो बोली- मेरे राजा और कस के चोदो !

फिर क्या था, मैंने स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों जन्नत की सैर करने लगे। अचानक मामी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और गाण्ड ऊपर उठाने लगी। मैं समझ गया कि मामी झड़ने वाली है। मैंने और स्पीड बढ़ा दी और मामी ने अपना पानी छोड़ दिया।

मैं भी चरम सीमा पर पहुँच गया था और मैंने भी अपना पानी उसकी चूत में उगल दिया।

हम दोनों काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। उस दिन से मैंने मामी की चुदाई पूरे सात दिन तक की क्योंकि फिर मेरी पत्नी अपने मायके से लौट आई।

मेरी यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी, मुझे मेल करें !

jaisspanchal@gmail.com

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